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Mohammed Aziz : 5000 से भी अधिक किताबे अलग-अलग भाषाओं में पढ़ी

Mohammed aziz
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दुनिया में ऐसे भी लोग हैं, जिनकी दिनचर्या किताबें पढ़ना है। दिन-प्रतिदिन का शौक अब आदत बन गया है। ऐसा ही एक व्यक्ति है जिन्होंने किताबे पढ़ने का शौक इतना विकसित किया कि 5000 से अधिक किताबे पढ़ डाले हैं।

Mohammed Aziz, जिन्होंने ने कभी एक किताब से शुरुआत की, जो आज 5000 से भी अधिक संख्या में तब्दील हो गई। किताबों का सिलसिला पुस्तक विक्रेता से स्थापित हुआ। 
आज इस लेख में Mohammed Aziz द्वारा चुने गए ऐसे मार्ग के बारें में विस्तृत चर्चा करेंगे और आपको पता चलेगा कि पुस्तकें एक ही भाषा में नहीं बल्कि कई भाषाओं में पढ़ी गई।

Bookstore का सिलसिला शुरू कैसे हुआ ? :

Mohammed Aziz का सफर बहुत दुखद था क्योंकि वह सिर्फ छह वर्ष की उम्र में अनाथ हो गया था। इस छोटी से उम्र में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। अपनी पढ़ाई पूरी करने में काफी असमर्थता का सामना किया।

 15 वर्ष की उम्र पहुंचने तक बहुत संघर्ष किया, हाई स्कूल की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए मछली पकड़ने का काम भी किया। उन्होंने डिप्लोमा करने का विचार किया था, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति के कारण आगे की पढ़ाई बंद कर दी और किताबें पढ़ने का सिलसिला शुरू किया |जीवन में सीखना जारी रखा, चाहें वह किताबे पढ़कर ही आये।

1963 में Mohammed Aziz ने पेड़ की छाँव में सिर्फ 9 किताबो के साथ पुस्तक विक्रेता की शुरुआत की और इसे अपना करियर मान लिया।

5000 पुस्तकें विभिन्न भाषाओं में पढ़ी गईं :

1967 में मोरक्को के राबत में एक बुक स्टोर खोला। पुस्तकें पढ़ने की आदत 1963 से ही लग चुकी थी। यद्यपि, आर्थिक संकट के कारण उन्होंने आगे की पढ़ाई पूरी नहीं करने से पढ़ने की आदत विकसित की। उनके द्वारा इस आदत को निरंतर बनाए रखा गया है। एक छोटे से कमरे में खुला बुक स्टोर, जिसमें वे लगातार किताबें पढ़ते रहते हैं।
1967 से लगातार कई किताबें पढ़ी और कई भाषाओं में पढ़ी। उसने अंग्रेजी, अरबी और फ्रेंच में भी पुस्तकें पढ़ी हैं।

Mohammed Aziz का पुस्तकों के प्रति अंदाज़ :

जब भी कोई उनके बुक स्टोर में पुस्तक खरीदने आता है, मिज़ाज़ जी उसको पढ़ने से दूर नहीं रखते। कहते हैं कि नकी दुकान सबके लिए खुली है, चाहे भुगतान करने की क्षमता कुछ भी हो।

इनके द्वारा इस भाव से यह प्रदर्शित होता है कि उन्होंने अपने जीवन में जिस परिस्थिति को अनुभव किया, वो कोई और न अनुभव करे। हर किसी को पढ़ने और आगे बढ़ने का मौका देना चाहते है। जो उनके द्वारा हो सकता है।
उनका पढ़ने का जूनून बहुत संक्रामक है। उनसे मिलने वाले हर व्यक्ति को साहित्य की बदलावकारी शक्ति की सराहना करने की प्रेरणा मिलती है।

Mohammed Aziz प्रतिदिन 8 घंटे पुस्तकें पढ़ते है

71 वर्षीय अज़ीज़ जी रोज कुछ अलग क्रिया करते हैं। 12 घंटे काम करते हैं और दिन में 8 घंटे पुस्तकें पढ़ते हैं। बिना पुस्तक पढ़े उनका दिन रह नहीं सकता।  बाकी घंटे खाने, सिगरेट और अन्य क्रियाओं में खर्च करते हैं।
आज वे 5000 पुस्तकों पढ़ चुके हैं, क्योंकि वे प्रतिदिन 8 घंटे पढ़ते हैं। उनकी दुकान 4 दशक से अधिक समय से अभी भी उसी स्थान पर है। उनका मिजाज बुकस्टोर से व्यापर करना ही नहीं है बल्कि वे पुस्तकों से परिवर्तनकारी शक्तियों में विश्वास रखते है।

उन्होंने एक विचार भी रखा है जो कि इस तरह है – “जो पढ़ नहीं सकता, वह किताबें नहीं चुराता और जो पढ़ता है, वह चोर नहीं है।”

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