Table of Contents
TogglePMEGP : ₹10 लाख का लोन ले और वापस करे सिर्फ ₹7 लाख

भारत में रोजगार को देखते हुए केंद्र सरकार द्वारा एक योजना का आरम्भ हुआ। जिसके अंतर्गत बेरोजगार युवा या नागरिक स्वरोजगार का सृजन कर, रोजगार बढ़ा सके। सरकारे बदली और इस योजना में कुछ न कुछ बदलाव हुए। जिसे आज PMEGP (Prime Minister’s Employment Generation Programme) के नाम से जानते है। इस योजना के माध्यम से केंद्र सरकार विनिर्माण और सेवा क्षेत्र व्यवसाय स्थापित करने में शुरूआती पूँजी की जरूरत को पूरा करती है। जिसकी सीमा ₹10 लाख से ₹25 लाख तक की है। ये ऋण केंद्र सरकार प्रदान करती है, साथ ही सब्सिडी भी दी जाती है।
सरकार ने इस योजना का लाभ उठाने के लिए विनिर्माण क्षेत्र में कुछ विशेष व्यवसायों को शामिल किया है, जिसकी जानकारी इस लेख में विस्तार से साझा की जाएगी।
PMEGP योजना क्या है और इसका उद्देश्य :
PMEGP योजना की शुरुआत अगस्त 2008 में हुई थी। यह एक स्वरोजगार सृजन के लिए एक अहम् कदम था। जिसका उद्देश्य शहर और ग्रामीण क्षेत्रो में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सके और भारत विकासशील से विकसित देशो में शामिल हो सके। इस योजना के अंतर्गत, जो नागरिक व्यवसाय करना चाहता है लेकिन पूंजी न होने की वजह से असमर्थ है, तो केंद्र सरकार शरुआती पूँजी की मदद कर व्यवसाय की शुरुआत और रोजगार सृजन में वृद्धि ही एकमात्र असल कदम है।
बैंक के माध्यम से ऋण प्रदान कर, सब्सिडी भी प्रदान की जाती है। इसके लिए कुछ विशेष पढ़ाई की आवश्यकता की जरूरत को दरकिनार रखा गया। सिर्फ आठवीं पास नागरिक भी इस योजना के पात्र हो सकते है।
उद्देश्य –
- शहरी और ग्रामीण क्षेत्रो में सूक्ष्म उद्यमों को शरू करके रोजगार पैदा करना।
- पारंपरिक कारीगरों व बेरोजगार युवाओ को योजना की मदद से स्वरोजगार के लिए समर्थन देना।
- कारीगरों की कमाई में बढ़ोतरी, जिससे ग्रामीण और शहर रोजगार में विकास में वृद्धि।
PMEGP योजना की शुरुआत :


इस योजना का नया नाम अगस्त 2008 में रखा गया, लेकिन आपको बताते चले कि इस योजना की शुरुआत 1993 में ही हो गयी थी। उस समय योजना दो भागों में थी, लेकिन 2008 में दोनों को एक में मिलाकर एक योजना बनाई गई।
PMRY (प्रधानमंत्री रोजगार योजना) और REGP (ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम) दो अलग-अलग योजनाएं थी।
1993 में PMRY योजना शुरू हुई। इसका लक्ष्य शिक्षित और बेरोजगार युवा लोगों को अपना व्यवसाय शुरू करने में मदद करना था। सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों में स्वरोजगार स्थापित करने के लिए सब्सिडी दी जाती थी।
1995 में REGP कार्यक्रम शुरू हुआ था। मुख्य लक्ष्य था ग्रामीण क्षेत्रों में सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना करके रोजगार बनाना। ग्रामीण क्षेत्रों में कारीगरों और बेरोजगारों को दीर्घकालिक नौकरी के अवसरों पर ध्यान दिया गया।
PMEGP लोन की सीमा, Subsidy और ब्याज दर:
RBI के नियमानुसार, सेवा क्षेत्र के लिए ₹5 लाख से अधिक की लोन सीमा है, जबकि विनिर्माण क्षेत्र के लिए ₹10 लाख से ₹25 लाख की लोन सीमा है। लोन मिलने से पहले ऋणकर्ता को 5%-10% का योगदान करने पर सहमति करनी पड़ती है। बैंक ऋणकर्ता के खाते में ऋण का 90% से 95% धन भेजता है।
श्रेणी के हिसाब से सब्सिडी को महत्त्व दिया गया है।। विशेष वर्ग को अधिक सब्सिडी दी गई है, जबकि सामान्य वर्ग को कम दी गई है।
विशेष वर्ग को 25% से 35% तक सब्सिडी दी गई है, जबकि सामान्य वर्ग को 15% से 25% तक सब्सिडी दी गई है।
PMEGP स्कीम के तहत 11% से 12% के ब्याज दर लागू होता है। लोन को 15 वर्षों तक वापस करने की योजना अनुमति देती है।


Subsidy Catagory विवरण :
लाभार्थी श्रेणी | लाभार्थी का शेयर (कुल परियोजना का) | शहरी सब्सिडी दर | ग्रामीण सब्सिडी दर |
सामान्य | 10% | 15% | 25% |
विशेष | 5% | 25% | 35% |
PMEGP लोन की पात्रता और डॉक्यूमेंट :
पात्रता :
- 18 वर्ष से अधिक की आयु
- आठवीं पास होना जरूरी
- विनिर्माण क्षेत्र के लिए ₹10 लाख से अधिक की लागत वाले लोन
- सेवा क्षेत्र के लिए ₹5 लाख से अधिक की लगत वाले लोन
- 1860 के तहत रजिस्टर्ड संस्थान
- केंद्र की योजना लाभ के लिए राज्य की योजना ग्रहण न हो।
डॉक्यूमेंट :
- आधार
- पैन कार्ड
- परियोजना रिपोर्ट
- ग्रामीण क्षेत्र का सर्टिफिकेट
- शिक्षा/कौशल विकास प्रशिक्षण/ईडीपी प्रमाणपत्र
- प्राधिकरण प्रमाणपत्र
GST रजिस्टर्ड उद्यमी इस योजना की मदद से अपने कारोबार को बड़े स्तर तक माप सकते हैं। जो छोटे उद्यमियों को बहुत फायदेमंद हो सकता है।