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ToggleHSBC PMI : विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के आंकड़ों से भारत के विकास का मिलता है अनुमान

किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर से मापा जाता है। अगर मैन्युफैचरिंगउद्योग में उत्पादन हो रहा है, तो मांग और पूर्ति का पूर्ण रूप से तालमेल है। लेकिन इसको देश की सारी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के साथ कैसे समझ सकते है। इसके लिए एक Index पब्लिश होता है। जो हर देश की मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर दोनों का मापन दिखाता है।
ये बेहद जरूरी इंडेक्स होता है, भारत में इसे देखने के लिए India’s HSBC PMI के नाम से जानते है। भारत देश के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में हुई वृद्धि और संकुचन को इसके आकंड़ों से समझ सकते हैं। वृध्दि और संकुचन देश के विकास और महंगाई की तरफ इशारा करते है। अर्थव्यवस्था में विकास दर धीमी या तेज के संकेत मिलते है।
इस लेख में HSBC service PMI के बारें में विस्तार से चर्चा करेंगे और साथ में अभी तक भारत मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के वृद्धि के बारें में भी बात करेंगे।
India's HSBC PMI क्या है? :


यह एक सूचकांक है जो भारत में हो रही वृद्धि और संकुचन को दिखाता है। Purchasing Manager’s Index, PMI का full फॉर्म है। ये अंको में एक आंकड़ा दिखाता है। जो 0 से 100 तक मापा जाता है। 50 के ऊपर वृद्धि और 50 के नीचे संकुचन माना जाता है। जो S&P Global द्वारा 400 से अधिक निर्माताओं के एक पैनल से एकत्र किए गए आंकड़ों पर आधारित है, – भारत की अर्थव्यवस्था को वैश्विक रूप से दिखाता है। सेवा और विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि और गिरावट को दिखाता है। जो भारत के हो रहे विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
50 के ऊपर रहने पर विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में विस्तार का संकेत मिलता है, जबकि 50 के नीचे रहने पर क्षेत्र में संकुचन (वृध्दि न होना) का संकेत मिलता है।
PMI में कौन से क्षेत्र शामिल हैं और और कैसे काम करता है ? :


PMI में 2 क्षेत्र आते है : विनिर्माण और सेवा क्षेत्र (Manufacturing and Service Sector)।
विनिर्माण PMI में नए ऑर्डर, उत्पादन, रोजगार, आपूर्तिकर्ता डिलीवरी और इन्वेंट्री को बराबर महत्त्व दिया जाता है।
सेवा PMI में गैर-विनिर्माण क्षेत्रों (परिवहन, बीमा, निर्माण और शिक्षा) से जुड़ी सारी जानकारी शामिल की जाती है।
PMI के अंतर्गत 6 उद्योग का अहम् महत्व होता है –
- परिवहन और संचार
- वित्तीय मध्यस्थता
- व्यावसायिक सेवाएँ
- व्यक्तिगत सेवाएँ
- कंप्यूटिंग और आईटी
- होटल और रेस्टोरेंट
0 से 100 के बीच PMI को संबोधित किया जाता है।
यदि पिछले महीने के दर्शाये गए PMI 50 से अधिक है, तो यह विस्तार को दिखाता है। अर्थात, दोनों क्षेत्रों (Manufacturing & Service Sector) में अच्छा उत्पादन होने से मांग और पूर्ति में वृद्धि होती है। इस प्रकार, ये भारत की विकास दर में वृद्धि दिखाते हैं।
यदि पिछले महीने के दर्शाये गए PMI 50 से कम है, तो यह संकुचन का संकेत है। यही कारण है कि दोनों क्षेत्रों (Manufacturing & Service Sector) में उत्पादन घट रहा है, जिससे मांग और पूर्ति में कमी हो सकती है। इस प्रकार, ये भारत की विकास दर को भी धीमा दिखाते हैं।
भारत की विकास दर में निरंतर वृद्धि के लिए PMI को 50 के ऊपर ही रहना चाहिए और हर महीने रिपोर्ट किए गए आंकड़ों में निरंतर वृद्धि होनी जरूरी है।
PMI का उपयोग किनके द्वारा अधिक होता है ? :


इसका अधिकांश उपयोग आपूर्तिकर्ता(Supplier), निवेशक(Investor) और कॉर्पोरेट प्रबंधक(Corporate Manager) करते हैं।
Corporate Manager –
प्रबंधक सर्वप्रथम मासिक आकंड़ो को देखता है और उसके अनुसार मांग की वृद्धि होने पर उत्पादन की मात्रा को निर्धारत करता है। आकंड़ो में विस्तार होने पर प्रबंधक कच्चे मॉल की मांग में बढ़ोत्तरी करता है।
Supplier –
मासिक आंकड़ों से भविष्य में मांग में वृद्धि की संभावना का पता लगाया जा सकता है। अगर आंकड़े विस्तार को प्रदर्शित करते है, तो आपूर्तिकर्ता इससे अनुमान लगा सकता है कि ग्राहकों के पास कितना मॉल उपलब्ध है और कितना मॉल अभी भी चाहिए है।
Invester –
PMI एक आर्थिक स्थिति का सूचकांक है, जो रोजगार, जीडीपी और औद्योगिक उत्पादन के अनुमानों में होने वाले बदलाव का संकेत देता है। एक निवेशक इसको देखकर ही अपने धन को वृद्धि के अनुमान के साथ ही निवेश करता है।
India's PMI लगातार बढ़ रही है:


अगस्त 2025 में जारी हुए आंकड़े लगातार 16 महीने के वृद्धि स्तर पर है। जो भारत के विकास को वैश्विक स्तर पर दर्शाते है।
जुलाई में HSBC सेवा PMI 60.5 पर रहा, जबकि जून में 60.7 पर था। यह दूसरा महीना है कि सेवा क्षेत्र 60 से अधिक है। जुलाई में कंपोजिट PMI 61 से 61.1 (MoM) पर था।
कम्पोजिट PMI का अर्थ है – विनिर्माण और सेवा क्षेत्र पीएमआई का औसत ।
भारत का विनिर्माण PMI पिछले 16 महीनों के उच्चतम स्तर पर है। जुलाई में वह 58.4 पर था, लेकिन जुलाई में 59.1 पर पहुंच गया। ये भारत की आर्थिक स्थिरता और विकास दर को दिखाता है।
PMI में निरंतर वृद्धि से प्रभाव :


विनिर्माण और सेवा PMI में निरंतर वृद्धि देश की अर्थव्यवस्था के विकास की ओर इशारा करती है। मांग की वृद्धि के चलते देश में उत्पादन बढ़ता है, जिससे रोजगार पैदा होता है। नए अवसर की तलाश जारी होती है। विनिर्माण क्षेत्र में निवेश में बढ़ोत्तरी होती है। सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था को तुरंत समझने का ये एक अच्छा सूचक है। जिसका देश में हो रहे विकास को आंकड़ों के तौर पर दिखाना सबसे महत्वपूर्ण है।