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ToggleDukaan : डिजिटल मार्केटिंग का नहीं था ज्ञान, लेकिन फिर भी खड़ी कर दी ₹800 करोड़ की कंपनी

कैसा हो अगर कोई आपकी ऑफलाइन स्टोर को कोई ऑनलाइन भी कर दे और आपको कुछ करना भी न पड़े। 2020 में ऐसा ही हुआ था। लॉकडाउन के दौरान हर व्यक्ति घर में कैद था। लोगो को कुछ सामान खरीदना भी मुश्किल हो रहा था। जिनकी खरीददारी और दैनिक खर्चे चलते थे उनकी आय रुक गई थी। ऐसे में एक ऐप बाजार में आता है और हर किसी की मुश्किलों को आसान बना देता है। हम “Dukaan” ऐप की बात कर रहे हैं।
जिसने इस मुश्किल को बहुत बारीकी से देखा और लोगों को इससे निकलने में मदद की। “Dukaan” ऐप की मदद से ऑफलाइन स्टोर को ऑनलाइन बनाया। लोगो की आमदनी में कोई रुकावट नहीं आयी और “Dukaan” ने 1 वर्ष में ₹100 करोड़ की नेटवर्थ बना डाली।
आज इस लेख में “दुकान” के बारे में विस्तार से चर्चा होगी और संघर्षयात्रा को आपके साथ साझा किया जाएगा।
आखिर क्यों, "Dukaan" ऐप की जरूरत क्यों पड़ी:


2020 में सभी ऑफलाइन स्टोर बंद हो गईं। लॉकडाउन के कारण लोग घरों में कैद हो गए। परेशानी आई जब छोटे खुदरे विक्रेताओं के कारोबार बंद हो गए। “दुकान” ऐप के संस्थापक और सीईओ “सुमित शाह” ने इसे गौर से देखा। लेकिन जब उन्होंने रेडियो में सुना कि व्हाट्सएप से आर्डर स्वीकार हो रहे हैं, तो वे हैरान हो गए। उनके दिमाग में “दुकान” का आईडिया आया। फिर क्या, दोस्त के साथ मिलकर 48 घंटे में एप्प बनाकर तैयार कर दिया। लोगो के पास सन्देश पहुंचते ही, मानो सैलाब आ गया। कंपनी चर्चे में आ गयी।
"Dukaan" के फाउंडर ने कैसे लिया डिजिटल मार्केटिंग का ज्ञान :


“दुकान” के फाउंडर और सीईओ सुमित शाह, मुंबई में एक मध्यमवर्गीय परिवार में 25 दिसंबर 1990 में जन्मे। इंजीनियरिंग तो सांगली से किया, लेकिन डिजिटल मार्केटिंग का कोई ज्ञान नहीं था। कॉलेज में रूममेट्स को इसका ज्ञान था और सुमित शाह ने उसी से डिजिटल मार्केटिंग, वेब डिजाइनिंग और डेवलपमेंट कोर्स सीखे। बाद में क्रेड और मैकडॉनल्ड्स जैसे बड़े और छोटे उद्यमों के साथ भी काम किया।
2014 में सुभाष चौधरी से फेसबुक पर मुलाकात हुई। जो कॉलेज ड्रॉपआउट था और टेक्नोलॉजी में माहिर था। दोनों की नजर डिजिटल मार्केटिंग पर थी। साथ मिलकर राइजमेट्रिक और Rankz.io कंपनी बनायीं | दोनों कंपनी SEO टूल्स पर आधारित थी | 2020 में CTO सुभाष चौधरी के साथ मिलकर “दुकान” की नीव रखी।
"Dukaan" ऐप का उपयोग :


“दुकान” ऐप कारोबारियों और खुदरा विक्रेताओं को तकनीकी की कम समझ रखने वालो की मदद करता है। जो ऑफलाइन दुकान को ई-कॉमर्स दुकान बनाने में सक्षम बनाता है। ऐप 30 सेकंड में खुदरा विक्रेताओं या कारोबारियों को अपना कारोबार ऑनलाइन स्थापित करने में मदद करता है। इस ऐप का सिर्फ एक ही मकसद है – ऑफलाइन स्टोर को ऑनलाइन लाना। व्यापारियों को बिना किसी तकनीकी ज्ञान के आसानी से एक ऑनलाइन व्यवसाय शुरू करने में सक्षम बनाना है।
"Dukaan" ऐप लांच के बाद हुआ विस्तार :


2020 में, अपने दोस्त सुभाष चौधरी के साथ मिलकर “दुकान” ऐप को लांच किया। लांच के 20 दिनों के अंदर ही, “दुकान” ऐप पर 1.5 लाख से अधिक दुकानें ऑनलाइन बनाई गईं। 5 लाख उत्पाद रजिस्टर हुए और 75,000 से अधिक आर्डर “दुकान” ऐप से भेजे गए। महामारी के दौरान, कंपनी ने एक वर्ष में ₹100 करोड़ का आंकड़ा छू लिया। इस ऐप ने पूरे भारत में 20 लाख छोटे और मंझोले कारोबार को ऑनलाइन माध्यम से विकसित करने का मौका दिया। “Dukaan” का वर्तमान नेटवर्थ ₹800 करोड़ है |