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Crow's Revenge Research

ढेर सारे कौवे का मंडराना कुछ संकेत देता है। विज्ञान की खोजों के अनुसार, एक कौआ को आक्रामक रूप से भगाना बहुत भारी पड़ सकता है। उस चेहरे को पढ़कर कौआ लंबे समय तक याद रखता है। यह दशकों तक चलता है। 10 से 15 वर्षों तक वाशिंगटन विश्वविद्यालय द्वारा की गई रिसर्च से हैरान करने वाली बात सामने आई।

जब किसी कौआ को आक्रामक रूप से भगाया जाता है, तो वही Crow दशकों तक अपने साथी कौओं (जिनकी संख्या 10, 20 या और अधिक हो सकती है)  के साथ परेशान करता है।

 उस व्यक्ति पर जोर से चिल्लाना, झपट्टा मारना, आकाश से अचानक छलांग लगाना आदि हरकते करना शुरू कर देते हैं। इस लेख में विज्ञान द्वारा किये गए शोध और Crow ऐसा क्यों करता है, इन सबके बारे  में विस्तार से चर्चा की जाएगी।

शोध हुआ क्यों और कब ? :

वाशिंगटन विश्विद्यालय के शोधकर्ताओं ने 2000 के दशक में एक पुष्टि के लिए कौवों पर दशकों लम्बा अध्ययन करने का फैसला लिया। स्थानीय और लोक कथाओं में पक्षियों की बुद्धिमत्ता का जिक्र लम्बे समय से जारी था |

इसकी पुष्टि करने के लिए वर्ष 2005 में वन्यजीव जीवविज्ञानी डॉ. जॉन एम. मार्ज़लफ़ के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने टीम बनाकर एक अनोखा प्रयोग किया।

जिनका उद्देश्य सिर्फ ये जांचना था कि Crows उन लोगो का चेहरा याद रख सकते है, जो उनको परेशान करते है या कभी बुरा किया होता है। अगर चेहरा याद रखते है, तो कितने समय तक ?

अध्ययन कैसे हुआ ? :

टीम ने फैसला किया कि “खतरे” का संकेत देने के लिए एक विशिष्ट रबर से बना गुफावासी मुखौटा पहना जाएगा। जो कौंवे को उस चेहरे को याद रखने में मदद करेगा
मुखौटे पहने एक टीम ने एक झुण्ड में कौवों को पकड़ा, उन्हें परेशान किया और फिर एक दिन छोड़ दिया।
अब वे मुखौटा पहनकर हर दिन उन कौवों की प्रतिक्रिया देखते हैं। वही कौवे उनको देखकर जोर से चिल्लाते और चीखते, आकाश से तेज उड़ते हुए आते और सिर की एक फुट की दूरी से छलांग लगाते, झपट्टा भी मारते।
कौवे उन मुखौटे पहने नकाबपोशों का पीछा भी करते। जब वो मुखौटे न लगाए होते तो Crows उनको परेशान नहीं करते थे और व्यवहार भी ठीक रहता।

टीम को इस शोध में हैरान करने वाली बात यह हुई कि उन कौवों में ऐसे भी कौवे शामिल थे जो कभी नहीं पकड़े गए या परेशान किए गए थे।
यह सिलसिला लंबे समय तक चला और 17 वर्षों तक अध्ययन किया गया कि वो कौवे लगातार उनपर शत्रुतापूर्ण तरह से परेशान करते हैं।

कौवों द्वारा की जाने वाली आक्रामकता की रणनीति को “Mobbing” कहते है। जिसमे पूरा झुण्ड चीखता, गोता लगाना और झपट्टा मारना शामिल होता है। 

शोध में और भी कुछ प्राप्त हुआ :

अन्य कौवों के शामिल होने से पता लगता है कि वो उनका संवाद खतरे तक ही सीमित नहीं था। भोजब के स्रोतों या और अन्य चीज़ के लिए भी संवाद कर सकते थे।

एक-दूसरे की शारीरिक भाषा और खाने की शैली की नक़ल  कर सकते थे। अपने घनिष्ठ परिवारों में किसी के मृत हो जाने पर ये एक तरह का अंतिम अंतिम संस्कार भी आयोजित करते थे। जिसमे कौवो का झुण्ड अपने मृत साथी के चारों ओर मौन शोक के लिए इकठ्ठा होते थे।

Crows ही नहीं, कुछ और पक्षी भी ऐसा करते हैं :

इस तरह की शोध विज्ञान ने कई पक्षियों पर आजमाया किया, जिससे पता चला कि ऐसी प्रवत्ति के लिए Crow ही एकमात्र पक्षी नहीं है। विभिन्न पक्षियों, जैसे ऑस्ट्रेलियाई मैगपाई, उत्तरी मॉकिंगबर्ड, कनाडा गीज़, सीगल, लाल पंखों वाले ब्लैकबर्ड और नीलकंठ, भी समान प्रवत्ति की हरकते और रणनीतियां रखते हैं।
ऐसा करने वाले पक्षी दुर्लभ हैं। लेकिन अध्ययन बताते हैं कि यह प्रजनन या घोसला बनाने वाले बड़े पक्षियों पर देखा गया है।
कौवे पर किये गए अध्ययन पाया गया कि छोटे प्रारूप (पक्षियों) में कौवा ही एकमात्र है, जो ऐसी प्रवत्ति रखता है।

शोध से यह ज्ञात नहीं हो पाया कि कितना लम्बे समय तक द्वेष धारण कर उन नकाबपोशों को परेशान करते। 17 वर्षो तक हो इस पर अध्ययन हुआ और जानकारी उपलब्ध हुई।
लेकिन आपको यह भी ध्यान रखना चाहिए कि किसी Crow से मिलने पर उनको परेशान तो नहीं करे, ऐसा करने से उनके कुनबे से लम्बे समय तक परेशान होने के लिए तैयार रहिये।

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